माँ-बेटा को है अटल विश्वास
एक दिन चखेंगे जीत का स्वाद
मोदी की लंका वो लगाएंगे
पप्पूवाले दुल्हनिया ले जाएंगे ।
कोई तो घर का भेदी लंका ढाहेगा
वो विभीषण शिद्धू या सिन्हा कहलायेगा ।
काश संजीवनी हरले कोंग्रेस की प्राण
लेकिन विकट समय में कौन बने हनुमान ?
क्या बुआ, भतीजा और दीदी,
लाएंगे फूल मुरझाने की विधि ?
या,लालू के दो अनमोल रत्नजोड़ा
रोकेंगे बीजेपी के अश्वमेघ का घोड़ा ?
अब ना फूलेगा छप्पन इंच का सीना
उठो पार्थ (केजू) ! लगाओ झाड़ू निशाना ।
शतरंज की बिसात में होगा अब शाह औ मात
जब धूर विरोधी चूहे-बिल्ली लगाएंगे एक पात ।
धृतराष्ट्र जनता को है, सब विदुर ज्ञान,
मूर्ख बनाना ना अब इतना आसान ।
एक तरफ कौरव, एक तरफ लंकेश,
यक्ष प्रश्न अभी भी है शेष ?
जो इस कलयुग में
वनवास राम का मिटाएगा
और रामराज्य लाएगा
वही पूर्ण विजेता कहलायेगा ।
कसम तुम दोनों को संविधान की,
कब, कौन, कितना ठगा है या ठगा था ?
विकास के अपहरण में और देश के चीरहरण में
कौन भरी सभा में, मौन खड़ा था ?
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