मेरे परम पूज्य पाठकों.....
मुझे यह कहते हुए,
हर्ष बहुत हो रहें हैं I
दिल के अनुरोध पे; तेरे लिए
कलम मेरे कुछ लिख रहें हैं II
हां, मैंने जो लिखा है,
कुछ, इस लायक बन पड़ा है
छा ज़ाऊ सारे आकाश में I
पर अभी तो भटक रहा हूँ
पर अभी तो भटक रहा हूँ
उम्मीदों के ही प्याले गटक रहा हूँ
पाठकों की तलाश में II
क्या खल्लास कविता गढ़ा है,
कुछ इधर से, कुछ उधर से,
हर रंग इसमे थोडा-थोडा है I
मैंने तो कुछ ही जोड़ा है,
बाकी सब बाहरी निवेश,
ढूंढ़ रहा; वो परिवेश II
मिले कोई पाठक विशेष,
बचे ना, अब प्रशंसा शेष III
महीनो काटें हैं वनवास में,
की, आज बड़े दिनों के बाद
मैं कुछ लिख रहा हूँ
चर्चा है सरे बाजार में I
की, आज बड़े दिनों के बाद
मैं कुछ लिख रहा हूँ
चर्चा है सरे बाजार में I
एक अद्दद हिट की ज़रूरत मुझे,
फ्लॉप चल रहां हुं आजकल I
मिल जाए मेहनत का सुफल,
बेचन मैं इसी इंतजार में II
कितने पापड़ हैं बेलें मैंने,
प्रकाशक के अख़बार में I
ले-देके मामला सुल्टा है,
हवा का रुख; अब
मेरी ओर पल्टा है II
आज मेरी उमंगें जवां हैं,
मेरे फसाने पे खुदा भी मेहरबां है I
दूर करो तुमभी ये रूश्वाई,
दुकां सजी है, चले आवो बाज़ार में II
पाठकों इसे छपवाने में,
कीमत है; खुब चुकाई I
बिकने तक की नौबत आई,
भिन्डी बाज़ार में II
काश! यह चल जाय,
फार्मूला हिट कर जाय I
लागत थोड़ी निकल आयेगी,
नैया अपनी पार लग जाएगी II
आ जाए लक्ष्मी हाथ में,
भले, आधी चली जाये उधार में I
कुछ तो लगाऊं अपने कारोबार में,
जो टिक सकूँ कम्पटीशन के बाज़ार में II
यहाँ तो बहुत ठेलम-ठेला है,
बड़े-बड़े शूरमाओ का रेला है I
देर से आया मै,
पर थोड़ी ज़गह बची है,
मेरे सामने कवियों की,
पूरी फौज खडी है II
सभी लौ -लश्कर लेकर ,
तीर-औ- तस्कर लेकर ,
कूद पडा मै भी, जंग-ए-मैंदान में I
आ देखें जरा,
किसमे कितना है दम ?
अश्त्र बहुत, इस ज्ञान के भण्डार में II
ए पाठकों ! मुश्किल के हर घडी में,
बन्दे को तेरा ही एक सहारा है I
बस एक गुजारिश- औ- अंतिम ख्वाहिश है,
कमी आये ना तेरे प्यार में II
फ्लॉप चल रहां हुं आजकल I
मिल जाए मेहनत का सुफल,
बेचन मैं इसी इंतजार में II
कितने पापड़ हैं बेलें मैंने,
प्रकाशक के अख़बार में I
ले-देके मामला सुल्टा है,
हवा का रुख; अब
मेरी ओर पल्टा है II
आज मेरी उमंगें जवां हैं,
मेरे फसाने पे खुदा भी मेहरबां है I
दूर करो तुमभी ये रूश्वाई,
दुकां सजी है, चले आवो बाज़ार में II
पाठकों इसे छपवाने में,
कीमत है; खुब चुकाई I
बिकने तक की नौबत आई,
भिन्डी बाज़ार में II
काश! यह चल जाय,
फार्मूला हिट कर जाय I
लागत थोड़ी निकल आयेगी,
नैया अपनी पार लग जाएगी II
आ जाए लक्ष्मी हाथ में,
भले, आधी चली जाये उधार में I
कुछ तो लगाऊं अपने कारोबार में,
जो टिक सकूँ कम्पटीशन के बाज़ार में II
यहाँ तो बहुत ठेलम-ठेला है,
बड़े-बड़े शूरमाओ का रेला है I
देर से आया मै,
पर थोड़ी ज़गह बची है,
मेरे सामने कवियों की,
पूरी फौज खडी है II
सभी लौ -लश्कर लेकर ,
तीर-औ- तस्कर लेकर ,
कूद पडा मै भी, जंग-ए-मैंदान में I
आ देखें जरा,
किसमे कितना है दम ?
अश्त्र बहुत, इस ज्ञान के भण्डार में II
ए पाठकों ! मुश्किल के हर घडी में,
बन्दे को तेरा ही एक सहारा है I
बस एक गुजारिश- औ- अंतिम ख्वाहिश है,
कमी आये ना तेरे प्यार में II
और भटकूँ ना दर-दर
ऐसे, तेरी तलाश में III
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