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Mere Lekh
बचपन की कवितायेँ
पाठकों से
छोटी-सी है मेरी बात
काव्य-जग का मैं नवजात.
मंद बढ़ता पथपर
हर अनुभव साथ लेकर.
भूल हो कोई; बिसार देना
भटके गर राहें; सँवार देना.
मैं पथिक ऐसा, राह में खड़ा प्यासा
प्यार चाहिए, प्यार देना.
बस छोटी सी है मेरी आशा .....पाठकों से.
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