पाठकों से

छोटी-सी है मेरी बात 
काव्य-जग का मैं नवजात.

मंद बढ़ता पथपर 
हर अनुभव साथ लेकर.

भूल हो कोई; बिसार देना
भटके गर राहें; सँवार देना.

मैं पथिक ऐसा, राह में खड़ा प्यासा 
प्यार चाहिए, प्यार देना.

बस छोटी सी है मेरी आशा .....पाठकों से.

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