जिंदगी के इस सफ़र में ,
तेरे हम-दम को तरसते हैं..............
चहकते थे कभी तेरे सोहबत में ,
वो लब अब सिसकते हैं I
गम की तन्हाईयों में अब ; बस
अश्कों के समंदर बरसते हैं I
महफिल मे रम गया होता ,
एक कारवां मिल गया होता ,
गर तेरा साथ ना छूटा होता I
अब तो वीरान राहों पे अकेले ,
काफिले से दूर...........बहुत दूर ,
बस मंजिल को तरसते हैं I
जिंदगी के इस सफ़र में ,
तेरे हम-दम को तरसते हैं..............
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