तुमसे ही ये गीत- ये नज्म है I
मैं चाँद , रश्मि हो तुम I
प्यार के आसमाँ की ,
वो खुबसूरत जमीं हो तुम I
जिन्हें क्षितिज के उस छोर का इंतजार है
जहाँ दोनों का मिलन हो I
कैसे बताएं तुम्हें, तुम मेरी कौन हो ?
दोपहर की तड़पती सोच में ,
ढलती शाम की तन्हाई में ,
रात की हसीन परछाईं में ,
सांसों में - धड़कन में ,
बस तेरा ही अहसास हम-कदम है I


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